उत्तर प्रदेश

विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की कमान

Kavita2
23 Sept 2026 3:11 PM IST
विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की कमान
x

उत्तर प्रदेश। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बदलाव करते हुए विभिन्न राज्यों के लिए नए प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से की गई नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं। इस बदलाव में उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े को दी गई है। अगस्त में जारी नियुक्ति में जगदीश ईश्वरभाई पटेल को उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी बनाया गया था।

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में तावड़े की नियुक्ति के बाद पार्टी ने संगठनात्मक तैयारियां तेज की हैं। हाल के दिनों में तावड़े ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर पार्टी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें की हैं।

विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी

भाजपा ने विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। तावड़े लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और चुनाव प्रबंधन से जुड़े रहे हैं। वह महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और बाद में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में तावड़े के सामने प्रदेश नेतृत्व, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा बूथ स्तर तक संगठन की गतिविधियों की समीक्षा और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़ी तैयारियां भी उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा हैं।

नियुक्ति के बाद तावड़े उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो चुके हैं। सितंबर में उन्होंने गोरखपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक बैठकें कीं और कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने तथा जनता के साथ संवाद मजबूत करने को कहा।

सह-प्रभारी की जिम्मेदारी

अगस्त में भाजपा की ओर से जारी नियुक्ति में राष्ट्रीय सचिव जगदीश ईश्वरभाई पटेल को उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया था। वह प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के साथ राज्य में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज को देख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में पार्टी संगठन को छह क्षेत्रों में बांटकर काम करती है। यहां 403 विधानसभा और 80 लोकसभा सीटें हैं। ऐसे में प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारी की भूमिका संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय में महत्वपूर्ण रहती है।

पंजाब की जिम्मेदारी सतीश पूनिया को

भाजपा के संगठनात्मक बदलाव में राजस्थान के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी ने अगस्त में उनकी नियुक्ति की थी।

पंजाब में भी 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्य में भाजपा अपने संगठन के विस्तार पर काम कर रही है। ऐसे में पूनिया की जिम्मेदारी राज्य इकाई और केंद्रीय संगठन के बीच तालमेल बनाने के साथ पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करने की होगी।

सतीश पूनिया राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं।

गुजरात का प्रभार तरुण चुघ को

भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल रहे तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी बनाया है। वह राज्यसभा सांसद हैं और पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।

गुजरात में भी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस कारण राज्य में संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की समीक्षा पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है।

इन नियुक्तियों को पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

2027 के चुनावों से पहले संगठन पर फोकस

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अगस्त में पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश अध्यक्षों और राज्य प्रभारियों के साथ बैठक की थी। इसमें उत्तर प्रदेश और गुजरात समेत 2027 में चुनाव वाले राज्यों की तैयारियों पर चर्चा हुई थी।

उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े की सक्रियता भी इसी संगठनात्मक कवायद का हिस्सा है। उन्होंने हाल के दौरे में बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनप्रतिनिधियों तथा संगठन के बीच समन्वय जैसे विषयों की समीक्षा की।

बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की तैयारी

उत्तर प्रदेश में भाजपा का जोर बूथ स्तर के संगठन को सक्रिय रखने पर है। प्रदेश प्रभारी बनने के बाद तावड़े ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों में संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल की बात कही है।

उन्होंने स्थानीय स्तर से मिलने वाले फीडबैक को संगठन तक पहुंचाने और क्षेत्रीय समस्याओं की जानकारी पार्टी नेतृत्व को देने पर भी जोर दिया। गोरखपुर में हुई बैठकों में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और पूर्व जनप्रतिनिधियों के अनुभव को संगठनात्मक तैयारियों में शामिल करने की बात कही गई।

इस दौरान पार्टी की मीडिया और डिजिटल पहुंच को लेकर भी चर्चा हुई है।

केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश इकाइयों के बीच कड़ी

भाजपा की संगठनात्मक व्यवस्था में प्रदेश प्रभारी केंद्रीय नेतृत्व और संबंधित राज्य इकाई के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करते हैं। प्रभारी राज्य में पार्टी की गतिविधियों, संगठनात्मक कार्यक्रमों और राजनीतिक परिस्थितियों की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाते हैं।

इसके अलावा प्रदेश नेतृत्व के साथ नियमित बैठक, संगठन की समीक्षा और विभिन्न अभियानों के क्रियान्वयन में भी उनकी भूमिका रहती है।

सह-प्रभारी इस काम में प्रदेश प्रभारी का सहयोग करते हैं और उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों या संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

विनोद तावड़े के पास लंबा संगठनात्मक अनुभव

विनोद तावड़े महाराष्ट्र भाजपा के प्रमुख नेताओं में रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार में वह स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और संस्कृति सहित कई विभाग संभाल चुके हैं। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी संगठन में काम किया।

वह बिहार में भी भाजपा के प्रभारी रह चुके हैं और अलग-अलग राज्यों में संगठनात्मक तथा चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों के दौरान भी उन्हें एनडीए की ओर से समन्वय से जुड़ी जिम्मेदारियां मिली थीं।

इसी अनुभव के बाद उन्हें राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश का प्रभार दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में बैठकों का दौर

प्रदेश प्रभारी बनने के बाद तावड़े ने सितंबर में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा शुरू किया। लखनऊ में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद गोरखपुर और अन्य क्षेत्रों में संगठनात्मक बैठकें हुईं।

बैठकों में विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति, बूथ स्तर की सक्रियता और संगठन तथा जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल पर चर्चा हुई।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले आने वाले महीनों में इस तरह की संगठनात्मक समीक्षा जारी रहने की संभावना है।

संगठनात्मक पुनर्गठन का सिलसिला

भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही है। अगस्त में विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात की जिम्मेदारी देने की घोषणा इसी प्रक्रिया का हिस्सा थी।

इन नियुक्तियों के बाद संबंधित राज्यों में प्रभारी नेताओं ने संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा शुरू कर दी है। खास तौर पर जिन राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ता संवाद और प्रदेश तथा केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े की नियुक्ति के बाद लगातार बैठकों और दौरों का सिलसिला चल रहा है। पार्टी की रणनीति और चुनावी नतीजों पर इन संगठनात्मक बदलावों का क्या असर होगा, इसका आकलन चुनाव के बाद ही किया जा सकेगा।

Next Story